
जलकुकड़े
मेरे पति एक नंबर के जलकुकड़े हैं; और आज तो इनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं है।
Bite-sized stories in Hindi
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मेरे पति एक नंबर के जलकुकड़े हैं; और आज तो इनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं है।

अपनी तक़दीर को पाना सब के नसीब में कहाँ होता है?

कभी बासी रोटी खाते हैं,

छोटा सा साथ, छोटी सी कहानी

पापा रोज़ बेटी को प्यार से उठाते, तैयार करते, बेटी की पसंद का नाश्ता बनाते और स्कूल छोड़ने जाते। आज बेटी सबसे पहले उठकर तैयार खड़ी है - पापा को वो आज उनके ऑफिस छोड़ने जाएगी।

यूँ होता तो क्या होता

नया प्रयोग, नयी विधा - तीन छोटी सी कविताएँ, जो आपस में जुड़ी हुई है। अगर आपको पसंद आएं तो ज़रूर बताइएगा। नए साल की अग्रिम शुभकामनाएँ 🎉

वो भारतीय सस्कृति को विश्व मे सबसे श्रेष्ठ मानता और कोशिश करता कि परिवार और मित्र जन हमेशा भारतीय परम्पराओ का पालन करें। समय बीता, उसका दृढ़ निश्चय बढ़ा और ...

इस साल की फसल सूखे में खराब हो गयी थी, और चार घंटे लाइन में लग कर उसे मुआवजे में मिले थे पूरे छब्बीस रुपये और इकतालिस पैसे। दिल्ली जाने का किराया ही तीन सौ रुपए है, उसके पास किसान आंदोलन में शामिल के पैसे भी नहीं हैं…

चलते चलते थक सा गया था, एक पेड़ के नीचे रुका तो एहसास हुआ कि घर से बहुत दूर आ चुका था - एकदम से मन में सैकड़ो सवाल गूँज गए - खाने-पीने का क्या होगा, कहीं कोई बड़े जानवर का शिकार बन गया तो?