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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी एवं सामाजिक विज्ञानं शोध पत्रिका, ISSN: 2348-2605 (इंटरनेशनल पत्रिका)

संवैधानिक रूप से हिन्दी भारत की राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जानेवाली भाषा है। परंतु आज फीजी, मॉरीशस, गयाना, सूरीनाम, यूरोप, अमेरिका, नेपाल आदि देशों में हो रही हिंदी-सेवा से वैश्विक परिदृश्य में हिंदी का एक नया व प्रबल चित्र उभर रहा है। गुण और परिमाण में समृद्ध, यह समर्थ और वैज्ञानिक लिपि वाली भाषा देश-विदेश में आधुनिक चुनौतियों को लांघते हुए विश्वव्यापी बन रही है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी एवं सामाजिक विज्ञान शोध पत्रिका ISSN:2348-2605 त्रेमासिक इंटरनेशनल पत्रिका है. पत्रिका का मुख्य…

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बुन्देलखण्ड क्षेत्र से ग्रामीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन विश्लेषणात्मक-अध्ययन

एक बेहतर जीवन जीने की ललक हर किसी के मन में होती है। एक अच्छा जीवन स्तर, सुख सुविधाओं व संसाधनों को जुटाने के लिये मनुष्य शुरू से ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाता रहा है। एक बेहतर कल की आकांक्षा लिये व्यक्ति सपरिवार बोरिया बिस्तर लेकर महानगरों की ओर निकल जाता है परन्तु यह उत्प्रवासन उपलब्ध संसाधनों के सापेक्ष अत्यधिक हो जाने के कारण ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या के अनुपात को बिगाड़ देता है व देश के…

कोविड-19 के बाद ग्रामीण–शहरी विकास का पुनर्संतुलन: भारत और यूरोपीय संघ के अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन

कोविड-19 महामारी केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट नहीं थी; उसने आधुनिक विकास-व्यवस्था, शहरीकरण, श्रम-प्रवास, आपूर्ति-शृंखला, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय शासन की संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर किया। भारत में महानगरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवासी श्रमिकों की अचानक वापसी ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्थाएँ अलग-अलग इकाइयाँ नहीं, बल्कि परस्पर निर्भर विकास-तंत्र के हिस्से हैं।…

"व्यावसायिक शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित शिक्षण एवं अधिगम की प्रभावशीलता का विश्लेषण"

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधुनिक शिक्षा में एक महत्वपूर्ण नवाचार बन गया है, जो व्यक्तिगत निर्देश, अनुकूली शिक्षण, बुद्धिमान ट्यूशन सिस्टम और वास्तविक समय प्रतिक्रिया के माध्यम से पारंपरिक शिक्षण और सीखने के तरीकों को बदल रहा है। वर्तमान अध्ययन, जिसका शीर्षक "व्यावसायिक शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित शिक्षण और सीखने की प्रभावशीलता का विश्लेषण" है, का उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा में…

उत्तर प्रदेश के छात्र नेताओं के योगदान का विश्लेषण

1905 से 1947 के बीच का काल भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण था , क्योंकि इसी अवधि में छात्र आंदोलन एक सशक्त राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आए। यह शोध पत्र – पत्र उत्तर प्रदेश के छात्र नेताओं के योगदान का विश्लेषण करता है , जो स्वदेशी आंदोलन , असहयोग आंदोलन , सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण चरणों में अग्रिम पंक्ति में सक्रिय रहे। इलाहाबाद…

डिजिटल चुनाव प्रचार और चुनावी घोषणा-पत्रों की बदलती भूमिका: भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक तंत्र है, जहाँ चुनाव केवल प्रतिनिधियों के चयन का माध्यम नहीं बल्कि जनमत, नीतिगत दिशा और लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति का प्रमुख साधन भी हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने चुनावी राजनीति की प्रकृति और स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। पहले जहाँ चुनाव प्रचार मुख्यतः जनसभाओं, रैलियों, पोस्टरों, पर्चों, समाचार पत्रों तथा…

’’बल्लभ डोभाल के कथा साहित्य में अभिव्यक्त लोक विश्वास एवं परंपराओं का विवरण’’

प्रस्तुत शोध पत्र में बल्लभ डोभाल के कथा साहित्य में लोक विश्वास एवं परंपराओं का विवेचन किया गया है। कथाकार बल्लभ डोभाल के साहित्य में लोक विश्वासों एवं परंपराओं का विभिन्न स्थानों पर वर्णन मिलता है। उतराखण्ड देवभूमि है। यहाँ के कण-कण में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। पर्वतीय क्षेत्र में प्रत्येक परिवार में स्थानीय देवी देवता एवं कुल देवता होतें हैं। लोक जीवन में इन्हीं देवी देवताओं का…

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों के अधिगम शैली का अध्ययन।

भारत सरकार द्वारा देश की विद्यालय शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के विचार से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.)की स्थापना इस उद्देश्य के साथ (प्रतिभाशाली छात्रों को पहचानना तथा उनका परिपोषण करना) की गई। इस हेतु राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा खोज योजना (एन.एस.टी.एस.एस.) से 1963 में शुरू की गई। जिसका लक्ष्य प्रतिभाशाली छात्रों को पहचानने और उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान करने के…

बीकानेर रियासत के आधुनिकीकरण में महाराजा सरदारसिंह का योगदान: एक ऐतिहासिक अध्ययन

उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध बीकानेर रियासत के इतिहास में परिवर्तन एवं पुनर्गठन का काल था। महाराजा सरदारसिंह के शासनकाल में प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक तथा लोककल्याण संबंधी अनेक ऐसे प्रयास किए गए, जिन्होंने बीकानेर राज्य को परम्परागत शासन व्यवस्था से आधुनिक प्रशासन की दिशा में अग्रसर किया। 1857 ई. की क्रांति के समय अंग्रेज़ी सत्ता के प्रति अपनाई गई उनकी व्यावहारिक नीति के परिणामस्वरूप राज्य की…

कामकाजी महिलाओं में कार्यस्थल एवं पारिवारिक तनाव तथा द्वन्द्व का विवेचनात्मक अध्ययन: चयनित कहानियों के संदर्भ में

समकालीन हिंदी कहानी-साहित्य में कामकाजी महिला का जीवन एक महत्त्वपूर्ण विमर्श के रूप में उभरकर सामने आया है। आधुनिक शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन के कारण महिलाओं की सार्वजनिक क्षेत्र में भागीदारी बड़ी है। अब पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के अतिरिक्त कार्यक्षेत्र की चुनौतियों का सामना भी महिलाओं को करना पड़ता है। इन दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते अनेक स्थानों पर महिलाएँ मानसिक तनाव का शिकार हैं।…

आधुनिक संस्कृत साहित्यकारों का भारतीय ज्ञान-परम्परा में योगदान: एक समालोचनात्मक अध्ययन

प्रस्तुत शोध-पत्र भारतीय ज्ञान-परम्परा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में साहित्य की केन्द्रीय भूमिका का सम्यक् विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारतीय ज्ञान-परम्परा जिसे वैदिक, उपनिषदिक तथा दार्शनिक ज्ञानधारा का समन्वित रूप माना जाता है, इसके अन्तर्गत साहित्य न केवल ज्ञान का संवाहक माध्यम है, अपितु वह सांस्कृतिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों का संवर्धक एवं संरक्षक भी है। वेद, उपनिषद, स्मृति-ग्रन्थ, महाकाव्य,…